Tuesday, June 13, 2023

आजुकजीवनआजुकसाहित्य

 धरतीपर माने दुनियाँमे, जहिना सात अरब लोक छैथ आ सातो अरब लोककेँ अप्पन-अप्पन इच्छा सेहो छैन तहिना अपनो तँ अछिए। किए ने रहत, जहिना सबहक सझिया दुनियाँ छिऐन तहिना अपनो हिस्साक तँ छीहे। मुदा तइमे एकटा बात आरो अछि, ओ अछि जे सात अरब लोकक सात अरब इच्छा जरूर छैन, मुदा सात अरब रंगक जीवन तँ नहि अछि। ओना, अप्पन-अप्पन जीवन सबहक छैन, मुदा समाजमे रहने सभक जीवन समटा गेल अछि। जइसँ रंग-रंगक जीवन रहितो, एकरंगाह बनियेँ गेल अछि। माने ई जे डॉक्टरी ज्ञान आ पेशा, डॉक्टरक श्रेणी समाजमे जहिना बना देने छैन तहिना आरो-आरोक बनियेँ गेल छैन। बनबो केना ने करतैन, मानि लिअ अहाँ बेटाक मूड़नक भोज हम खेलौं, तहिना अपनो बेटाक मूड़नक भोज अहाँकेँ खुआएब अछि किने, जँ से नहि करब, तखन कर्मगत जीवन मनुक्खक भेल केना। मनुक्ख सामाजिक प्राणी छी तँए समाजक संग चलइ पड़त। समाजक जीवन पशु जकाँ मनुक्खक थोड़े अछि।

बाबाक अमलदारीमे जखन अप्पन जन्म भेल तखन बाबा गार्जन छला। हुनके विचारे परिवार चलै छल। जहिना माए छेली तहिना बाबूओ छला। दादीक परम भक्त माए छेली आ बाबाक भक्त बाबू। जहिना भगवानक भक्त सोल्होअना भगवानपर ओङ्गैठ जाइ छैथ तहिना पितोजी आ माइयो बाबा-दादीपर ओङ्गठल रहैथ। ऐठाम ई नइ बुझब जे द्वापर युगमे महाभारतक लड़ाइयक दुनू खेमामे माने कौरवो आ पाण्डवोक खेमामे रणनीतिपर विचार चलि रहल छल आ अर्जुन नीन भेल सुतल छला तहिना पितोजी आ माइयो सुतल रहैथ। जहिना अर्जुन कृष्णपर ओङ्गठल छला तहिना माता-पिताजी बाबा-बाबीपर, माने कर्म जहिना ज्ञानपर ओङ्गैठ जाइए तहिना।
किसान परिवारमे जन्म भेल अछि। अप्पन वंशक इतिहास तँ बेसी बुझल नहि अछि जे गाममे कहियासँ बाँस भेल, केना परिवार बनल आ केना कोन रूपक जिनगी बना पूर्वज अप्पन परिवारकेँ ठाढ़ केलैन, मुदा तीन पीढ़ीक तँ बुझल अछिए।
माता-पितासँ बच्चामे ओते सम्बन्ध नहि बनल छल जेते बाबा-दादीसँ रहल। परिवारसँ निकैल खेत-पथारमे माइयो आ बाबूओ काज करए जाइ छला। जहिना दादी परिवारक काज सम्हारै छेली तहिना बाबा खेती-पथारीसँ लऽ कऽ दुआरो-दरबज्जा आ खुट्टा परक मालो-जालक तकतियान करै छला। बाबूकेँ जे काज सुमझा दइ छेलखिन ओ काज बाबू अप्पन अभ्यासानुसार करैत रहैथ। तँए मनमे एहेन कोनो चिन्तो ने रहै छेलैन जे कोन धानक बीआ कोन नक्षत्रमे पाड़ल जाएत आ कोन रूपक फलक गाछ कोन मासमे जनमबो करत आ ओकरा रोपलो जाएत। तहिना तीमनो-तरकारीक आ दरबज्जापर लगल फूलोक छेलैन।
आने-आन मनुक्ख जकाँ माइयो-बाबूकेँ एहेन भ्रम छेलैन्हे जे जहिना अखन माता-पिताक देख-रेखमे छी तहिना सभ दिन रहब। सभ दिन ओहो रहबे करता आ अपनो रहबे करब। ओना, बर-बेमारीक संग आन-आन माए-बापकेँ मरितो देखिते छेलखिन मुदा तैयो तहिना बुझै छला। भ्रमक कारण ई छेलैन जे कियो साँप कटलासँ जँ मरैए आकि केंसर सन रोगसँ, जेकरा साँप काटत आकि जेकरा केंसर हएत ओ ने मरत। आ जँ अपना ने साँप काटए, ओते सहचेत रही, आ ने केंसर हुअए, तखन मरब किए।
तीन बीघा खेतक किसान बाबा छला। दू बीघा अन्नक खेती करैत रहैथ, बाँकी एक बीघामे घर-घराड़ी, दुआर-दरबज्जासँ लऽ कऽ मालक थैर, अन्नक खरिहाँन, खढ़क खरहोरि, गाछी-कलम सभ मिला कऽ छेलैन।
ऐठाम एकटा बात अछि। गाछी-बिरछी, कलम-बाग, गाछ-बिरीछ आ कलम-गाछक बीचक अन्तर, माने दूरी। जैठाम गाछक समूह भेल ओ भेल गाछी, ओना आनो-आन माने एकसँ अधिक किस्मक गाछक समूह सेहो गाछी भेबे कएल। मुदा बाबाक अमलदारीमे जे अपना परिवारमे छल, से कहै छी। आमक मासकेँ गुनि, तीन मासक फल आमकेँ मानि नेने छला। तीनू मासक हवा-पानि-ताप तीन रंगक अछिए। तीन हिस्सामे आमक मासकेँ मानि तीन रंगक तीनटा आमक गाछ रोपने रहैथ। बुझल अछिए जे जहिना आम-लोक आमक राजा होइए तहिना आमक फल सेहो फलक राजा छीहे। समय पकड़ाएल तँ खूब फड़त, जँ से नहि पकड़ाएल तँ सपतो खाइले नहि रहत। खाएर जे से, बाबाक समटल परिवार छेलैन। जाबे धरि अपने जवान भेलौं, माने दुरागमन भेल, ताबे धरि पाँचे-छह गोटेक परिवार छल। मुदा अपना अमलदारीमे परिवारमे लोकक बाढ़ि आबि गेल। दुनू परानीक मन मानिते अछि जे बेटा रत्न छी, मुदा भेटैए केकरो-केकरो। फेर अपने मनमे ईहो हुअए जे रत्न तँ बनौलो जाइये सकैए। नमहर आशा मनमे छेलए-हे। बाबाक जहिना अपने तेसर पीढ़ी भेलौं तहिना परिवार सेहो तीन गुणा बढ़िकऽ भऽ गेल अछि।
अप्पन सम्पैतकेँ माने खेतकेँ बाबा अप्पन जीवनमे बान्हि चलबै छला। छोट परिवार छेलैन्हे, जहिना खेबामे शौकिन रहैथ तहिना उपजबैयोमे रहबे करैथ। भाय, जखन अपना हाथे खेती करब तखन अप्पन मनोनुकूल किए ने करब। बाबा अप्पन जीवनकेँ काटि-छाँटिकऽ अप्पन पारिवारिक जीवन बनौने छला। माने ई जे सइयो रंगक अगहनी धानमे मात्र दुइये रंगक धान उपजबै छला। चूड़ा ले वासमती आ भात ले तुलसीफुल। भाय, अपना सभ मैथिल छी किने। मैथिल परिवार ओहन परिवार अछिए, जइमे एक साँझ चूड़े खेबाक चलैन अछि। ई दीगर जे दहीक संग चूड़ा कि दालि-तरकारीक संग चूड़ा आकि भुजल-भिजौल चूड़ा।
बाबाक देखा-देखीसँ अपनो जीवन ओहने बनेबाक विचार मनमे रोपि ओइ पाछू लागि गेलौं। हुनके अमलदारीकसँ माने बाबाक अमलदारीक अन्नो, फलो-फलहरी आ तीमनो-तरकारीक बीआ-बाइल अपने बनबै छी आ साले-साल खेती करै छी। ऐठाम ई नइ बुझब जे मिथिलामे साग-पातसँ लऽ कऽ फलो-फलहरी आ अन्नो-पानिक चर्च दुनियाँक वायुमण्डलमे नइ गनगनाइए, सेहो तँ गनगनाइते अछि। मुदा बाबाक अमलदारीमे जे रूप-गुण आ सोभाव ओइ सभक, माने अन्नो आ फलो-तरकारीक छल, तइमे मिसियो भरि सुधार नइ भऽ सकल। जाँतक तरौटा जकाँ अखनो ओहिना मिथिला गाड़ल अछि जेना पूर्वजक बीच छेलैन। दुनियाँक नामी आम मालदह, पार्वतीक छाती स्वरूप बेल, लक्ष्मी-सरस्वतीक दाँत सन दानादार दारीम आ कागज सन कागजी नेबो इत्यादि-इत्यादिक रूप-गुणमे की नवपन आएल आकि ओ उपैट रहल अछि.!
#टकुआटान, कथा संग्रह, 2023, श्री जगदीश प्रसाद मण्डल, पल्लवी प्रकाशन, पृष्ठसंख्या: 55-56


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